डूंगरपुर से लगभग 58 किलोमीटर की दूरी पर माही नदी के तट पर स्थित है। यह जगह सैयद फखरुद्दीन की दरगाह के लिए जानी जाती है। वह एक प्रसिद्ध संत थे जिन्हें उनकी मृत्यु के बाद गलियाकोट में दफनाया गया था। गलियाकोट दरगाह को सफेद संगमरमर से बनाया गया है और उनकी दी गई शिक्षाओं को दरगाह की दीवारों पर उकेरा गया हैं। गुंबद के भीतरी हिस्से को सुंदर पर्णकुटी से सजाया गया है जबकि क़ुरान की शिक्षाओं को कब्र पर सुनहरे अक्षरों में वर्णित किया गया है। गलियाकोट दरगाह डूंगरपुर के प्रमुख पर्यटक स्थलों में से एक है जहाँ देश के कोने-कोने से लोग दरगाह में माथा टेकने आते है। हरे-भरे सुंदर बगीचे से घिरे गलियाकोट के इस धार्मिक स्थल का एक विशेष महत्त्व हैं। तीन राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच में स्थित, यह क़स्बा आदिवासी गांवों के एक समूह से घिरा हुआ है। यहाँ कोई प्रवेश शुल्क नहीं है एवं सूर्योदय से लेकर रात्रि तक कभी भी आ सकते हैं। वैसे यात्रा या घुमने के हिसाब से आ रहे हैं तो सर्दी का मौसम सबसे उपर्युक्त है क्योंकि गर्मी के मौसम में तापमान 45 डिग्री तक रहता है। यहाँ पहुँचने के लिये निकटतम हवाई अड्डा उदयपुर है एवं ट्रेन सेवा भी डूंगरपुर तक ही है।
कैसे जाएं